देहरादून। उत्तराखंड में मानसूनी आफत और लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। जगह-जगह भूस्खलन और पहाड़ दरकने से राज्य के 99 से अधिक यातायात मार्ग पूरी तरह ठप पड़ गए हैं, जिससे आवाजाही में भारी अड़चन आ रही है। इसके साथ ही पर्वतीय इलाकों में लगातार बारिश के चलते राज्य की तमाम प्रमुख नदियां उफान पर हैं और उनका जलस्तर चेतावनी के निशान के करीब पहुंच गया है।

सीमांत पिथौरागढ़ में सबसे ज्यादा तबाही, संपर्क मार्ग कटे

सड़कों के बंद होने से सबसे बुरा प्रभाव सीमांत जिले पिथौरागढ़ में देखने को मिल रहा है। यहां रणनीतिक और आवागमन के लिहाज से बेहद अहम 'धारचूला-तवाघाट' तथा 'न्यू सबेला तिदांग' राष्ट्रीय राजमार्ग बंद पड़े हैं। इसके अतिरिक्त जिले के 21 ग्रामीण रास्तों पर मलबा आने के कारण दूरदराज के इलाकों का तहसील और जिला मुख्यालयों से संपर्क कट चुका है, जिससे स्थानीय लोगों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।

अन्य जिलों में भी थमे पहिए, रास्ते खोलने में जुटा प्रशासन

पिथौरागढ़ के अलावा प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। आंकड़ों के अनुसार चंपावत जिले में 14, राजधानी देहरादून में 13, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी में 11-11 मुख्य व संपर्क मार्ग बंद हैं। इसके अलावा चमोली में 9, पौड़ी व टिहरी में 7-7, नैनीताल में 3, बागेश्वर में 2 तथा अल्मोड़ा में 1 सड़क पर आवागमन पूरी तरह रुका हुआ है। लोक निर्माण विभाग और संबंधित एजेंसियां मलबे को साफ कर रास्तों को दोबारा बहाल करने के प्रयास में जुटी हैं।

खतरे के निशान के करीब पहुंचीं काली, गंगा और अलकनंदा

लगातार हो रही बारिश के कारण राज्य के जल निकायों में जलस्तर खतरनाक स्तर तक बढ़ गया है। पिथौरागढ़ में काली नदी का जलस्तर 888.60 मीटर दर्ज किया गया, जो कि इसके 890 मीटर के खतरे के निशान के बेहद करीब है। उधर रुद्रप्रयाग में अलकनंदा और मंदाकिनी नदियां भी उफान मार रही हैं। वहीं हरिद्वार में गंगा नदी का जल स्तर 291.55 मीटर तक पहुंच गया है, जबकि वहां 294 मीटर पर खतरे का निशान तय है। प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए तटीय इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया है।