हरिद्वार कुंभ में बड़ा फैसला, देवी-देवताओं का रूप धर नृत्य करने पर प्रतिबंध
हरिद्वार। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने देवी-देवताओं का रूप धारण करके नृत्य करने जैसी गतिविधियों को सनातन धर्म का प्रत्यक्ष उपहास करार दिया है। परिषद ने कड़ा रुख अपनाते हुए आगामी नवरात्रि से ही ऐसे कृत्यों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी है और कहा है कि इस पर लगाम लगाने के लिए आगामी कुंभ मेले में विशेष कानून बनाने पर गंभीर मंथन किया जाएगा।
सनातन धर्म के उपहास पर अखाड़ा परिषद की दोटूक
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मां दुर्गा, मां काली या अन्य देवी-देवताओं का स्वरूप धारण कर मंचों या सार्वजनिक स्थलों पर नृत्य करने जैसी अशोभनीय हरकतें अब कतई बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। उन्होंने कहा कि इस तरह के कृत्यों से विरोधी ताकतों को सनातन संस्कृति का मजाक उड़ाने का अवसर मिलता है, जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है। परिषद की चेतावनियों के बावजूद ऐसी घटनाएं सामने आने के बाद अब सख्त कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया गया है।
नवरात्रि के दौरान कड़ी निगरानी और संगठनों से सहयोग की अपील
अखाड़ा परिषद ने आगामी नवरात्रि पर्व के दौरान ऐसे आयोजनों और स्वरूपों पर पैनी नजर रखने का फैसला किया है। नियमों का उल्लंघन कर देवी-देवताओं का रूप धरकर नाचने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें कानूनी परिणामों का सामना करना होगा। इसके साथ ही, परिषद ने धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन करने वाले सभी संगठनों और समितियों से अपील की है कि वे ऐसे आयोजनों को रोकने में प्रशासन और संतों का सहयोग करें ताकि सनातन संस्कृति की गरिमा सुरक्षित रखी जा सके।
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