देहरादून: उत्तराखंड के प्रशासनिक डिजिटल नेटवर्क को निशाना बनाते हुए साइबर अपराधियों ने शनिवार को एक बड़ा हमला अंजाम दिया। इस मालवेयर अटैक के कारण मुख्यमंत्री राहत कोष समेत राज्य के 10 प्रमुख सरकारी विभागों की आधिकारिक वेबसाइटें अचानक बाधित हो गईं और एहतियातन उन्हें बंद करना पड़ा। सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी (ITDA) की तकनीकी टीम ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए कड़ी मशक्कत के बाद डेटा बैकअप की मदद से अधिकांश पोर्टलों का संचालन दोबारा चालू कराया, हालांकि संवेदनशील मुख्यमंत्री राहत कोष का डिजिटल पोर्टल काफी देर तक पुनर्बहाली की प्रक्रिया में ही रहा।

अचानक हुए मालवेयर अटैक से हड़कंप और रूसी नेटवर्क से जुड़े होने का संदेह

शनिवार को जैसे ही डिजिटल प्रणालियों में मालवेयर की घुसपैठ का पता चला, आईटीडीए के तकनीकी महकमे में हड़कंप मच गया और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों को तत्काल सतर्क किया गया। सुरक्षा मानकों के तहत नेटवर्क क्षति को रोकने के लिए प्रभावित विभागों की वेबसाइटों को अस्थायी रूप से बंद किया गया। प्रारंभिक जांच में इस साइबर अटैक के तार रूस से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि जांच एजेंसियां अभी इसकी पूरी तरह पुष्टि करने में जुटी हुई हैं। पूर्व में किए गए सुरक्षा इंतजामों और बैकअप सिस्टम की बदौलत कुछ ही घंटों के भीतर ज्यादातर डिजिटल सेवाएं सामान्य कर ली गईं।

प्रमुख जनोपयोगी और प्रशासनिक महकमों के ऑनलाइन पोर्टल हुए थे प्रभावित

इस डिजिटल घुसपैठ का शिकार बनने वाले सरकारी विभागों में मुख्यमंत्री सहायता कोष के अलावा लोक निर्माण विभाग, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण, राज्य कर विभाग, कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC), परिवहन विभाग और पर्यटन विभाग शामिल रहे। इन सभी पोर्टलों पर आम नागरिकों से जुड़ी सेवाएं संचालित होती हैं, जिसके कारण अल्पकाल के लिए डिजिटल नागरिक सुविधाएं प्रभावित रहीं, जिन्हें बाद में सुरक्षित सर्वर बैकअप के माध्यम से दोबारा बहाल कर दिया गया।

अक्टूबर 2024 के विशालकाय हमले से सीख और वर्तमान सुरक्षा स्थिति का आकलन

उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2024 में उत्तराखंड के सरकारी डेटा सेंटर पर राज्य के इतिहास का सबसे भीषण साइबर हमला हुआ था, जिसके चलते मुख्यमंत्री हेल्पलाइन सहित 90 से अधिक सरकारी पोर्टल कई दिनों तक ठप पड़े रहे थे। उस संकट के बाद लागू की गई मजबूत डेटा बैकअप नीति और उन्नत सुरक्षा घेरे के कारण ही इस बार का बड़ा खतरा टल गया। आईटीडीए अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मालवेयर को समय रहते डिटेक्ट कर निष्प्रभावी बना दिया गया है और ऐसी घुसपैठ से निपटने के लिए तकनीकी टीम निरंतर निगरानी रख रही है।