आफत वाला मानसून: उत्तराखंड में 211 करोड़ की चोट, विकास कार्य प्रभावित
देहरादून: उत्तराखंड में इस वर्ष मानसूनी बारिश और भूस्खलन ने भारी तबाही मचा रखी है, जिससे राज्य के कई क्षेत्रों में आपदा जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण पर्वतीय और मैदानी इलाकों में यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। लोक निर्माण विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में 100 से अधिक महत्वपूर्ण मार्ग मलबे और भूस्खलन के चलते पूरी तरह बंद पड़े हैं। 21 जून से 12 अगस्त 2026 तक सड़कों को पहुंचे नुकसान का आंकड़ा 211 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है, जबकि मानसून का एक महीने से अधिक का समय अभी बाकी है।
सड़कों की बहाली और विभागीय तैयारी
लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय का कहना है कि प्रदेश में मानसून पूरी तरह सक्रिय है, जिससे बार-बार मार्ग बाधित हो रहे हैं। विभाग का लक्ष्य है कि किसी भी बंद रास्ते को 24 घंटे के भीतर आवाजाही के योग्य बनाया जाए। इसके लिए संवेदनशील स्थानों पर भारी मशीनें और पोकलैंड तैनात की गई हैं। कई स्थानों पर एक ही मार्ग में थोड़ी-थोड़ी दूरी पर भूस्खलन होने के कारण यातायात बहाल करने में अतिरिक्त समय लग रहा है।
चालू मानसून सीजन में सड़कों का हाल
इस मानसूनी सीजन में अब तक कुल 1944 सड़कों पर आवाजाही ठप हुई है। इनमें 144 राज्य मार्ग, 1629 ग्रामीण सड़कें, 86 मुख्य जिला मार्ग, 18 राष्ट्रीय राजमार्ग और 70 अन्य जिला मार्ग शामिल हैं। हालांकि विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 1821 सड़कों को पूरी तरह और 21 मार्गों को आंशिक रूप से खोल दिया है, लेकिन 102 मार्ग अब भी पूरी तरह बंद हैं। इन रास्तों को अस्थायी रूप से शुरू करने में अब तक 19 करोड़ रुपये व्यय हो चुके हैं, जबकि सड़कों को पहले जैसी स्थिति में लाने के लिए लगभग 211.10 करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी।
पौड़ी जिला सबसे अधिक प्रभावित
प्राकृतिक आपदा का सबसे बड़ा प्रभाव पौड़ी जिले में देखा गया है, जहां सर्वाधिक 375 सड़कें बंद हुई हैं। इसके विपरीत उधम सिंह नगर जिला सबसे कम प्रभावित रहा, जहां केवल एक सड़क मार्ग पर यातायात बाधित हुआ। अन्य जिलों की बात करें तो टिहरी में 261, चमोली में 186, पिथौरागढ़ में 182, अल्मोड़ा में 181, देहरादून में 173, उत्तरकाशी में 164, नैनीताल में 138, रुद्रप्रयाग में 101, बागेश्वर में 100, चंपावत में 61 और हरिद्वार में 17 सड़कें बारिश से प्रभावित हुई हैं।
पिछले वर्ष का मानसूनी नुकसान
उत्तराखंड में हर साल बारिश के मौसम में लोक निर्माण विभाग को भारी वित्तीय क्षति उठानी पड़ती है। पिछले मानसूनी सीजन (21 जून से 30 सितंबर 2025) के दौरान राज्य भर में कुल 1997 सड़कें बाधित हुई थीं। उस समय बंद मार्गों को तुरंत खोलने के लिए विभाग ने 91.83 करोड़ रुपये खर्च किए थे, जबकि क्षतिग्रस्त सड़कों की पूर्ण मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए 313.43 करोड़ रुपये का बजट अनुमानित किया गया था।
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