गैस सिलेंडर रिफिल में परेशानी बढ़ी, CM हेल्पलाइन की सूची में पहुंची LPG शिकायतें
देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में 'सीएम हेल्पलाइन 1905' की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की है। इस समीक्षा रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है, जहां पहली बार रसोई गैस सिलिंडर न भरने से जुड़ी शिकायतें टॉप-10 मुख्य समस्याओं में शामिल होकर 69.3 प्रतिशत के स्तर पर दर्ज की गई हैं।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग से जुड़ी नई समस्याएं शीर्ष दस में
सीएम हेल्पलाइन की इस ताजा रिपोर्ट में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अंतर्गत आने वाली रसोई गैस सिलिंडर की रिफिलिंग से संबंधित शिकायतें पहली बार शीर्ष-10 शिकायतों की सूची में शामिल हुई हैं, जबकि बीते दो वर्षों के दौरान यह कभी मुख्य समस्याओं का हिस्सा नहीं थीं। इसके अलावा प्रदेशभर से पेयजल आपूर्ति ठप रहने, बिजली कटौती और बिजली बिलों में संशोधन से जुड़ी तमाम शिकायतें भी बड़ी संख्या में दर्ज की गई हैं।
निस्तारण मामलों में रुद्रप्रयाग अव्वल, मैदानी जिले फिसड्डी
जिलावार शिकायतों के त्वरित निस्तारण के आंकड़ों पर नजर डालें तो रुद्रप्रयाग जिला 36.71 प्रतिशत की सफलता दर के साथ पूरे प्रदेश में पहले पायदान पर रहा है। इसके बाद टिहरी गढ़वाल 36.22 प्रतिशत के साथ दूसरे और पौड़ी गढ़वाल 35.76 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर काबिज हैं, जबकि राजधानी देहरादून में शिकायतों के समाधान का प्रतिशत 32.28 दर्ज किया गया। इसके विपरीत, सूची में सबसे निचले पायदान पर नैनीताल 21.80 प्रतिशत और ऊधम सिंह नगर जिला 21.08 प्रतिशत के साथ काफी पीछे नजर आया।
शिकायतों की संख्या बढ़ी पर समाधान की अवधि घटी
वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के तुलनात्मक आंकड़ों का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट हुआ है कि पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार कुल शिकायतों का ग्राफ बढ़ा है। पिछले वर्ष जहां 1,68,511 शिकायतें दर्ज हुई थीं, वहीं इस बार बढ़कर यह आंकड़ा 2,23,001 पहुंच गया है। इसके बावजूद राहत की बात यह है कि प्रमुख विभागों में शिकायतों के निस्तारण का औसत समय काफी कम हुआ है, उदाहरण के लिए राजस्व विभाग में जो मामले पहले औसतन 90 दिनों में सुलझते थे, वे अब घटकर मात्र 54 दिनों में ही हल किए जा रहे हैं।
विभिन्न विभागों से जुड़ी प्रमुख समस्याओं का आंकड़ा
समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार रसोई गैस रिफिलिंग से जुड़ी शिकायतें खाद्य आपूर्ति विभाग के अंतर्गत 70.7 प्रतिशत, बिजली कटौती से जुड़ी यूपीसीएल की शिकायतें 53 प्रतिशत, राजस्व विभाग से संबंधित जांच की मांग 52.2 प्रतिशत और जल संस्थान के अंतर्गत पानी न आने की शिकायतें 50.3 प्रतिशत दर्ज की गई हैं। इसके अतिरिक्त यूपीसीएल के मीटर बदलाव से जुड़ी समस्याएं 44.3 प्रतिशत, पेयजल निगम के अंतर्गत पानी न आने की दिक्कत 42.1 प्रतिशत, गृह विभाग के शिकायती पत्र 40 प्रतिशत, लोक निर्माण विभाग की क्षेत्र समस्याएं 37.3 प्रतिशत, अत्यधिक बिजली बिल के मामले 37.3 प्रतिशत और श्रम विभाग से जुड़ी अवैध सेवा समाप्ति की शिकायतें 37 प्रतिशत के स्तर पर रिकॉर्ड की गई हैं।
रत हो या अमेरिका, अच्छी टेक नौकरी पाने के लिए सिर्फ डिग्री काफी नहीं
13 साल पुराने डकैती कांड में सात दोषियों को 10-10 साल की सजा
जयपुर नगर निगम चुनाव: भाजपा की पार्षदों की बाड़ेबंदी की तैयारी, कांग्रेस भी सक्रिय
नेशनल लोक अदालत में लगभग 577584 मामले निराकृत