नई दिल्ली: भारत के तेजी से विकसित हो रहे लेबर मार्केट में गिग इंटरनेट वर्कर्स की संख्या में लगातार भारी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जिसके वर्ष 2030 तक बढ़कर लगभग 2.1 करोड़ तक पहुंच जाने का अनुमान है, हालांकि इस उभरते हुए रोजगार बाजार में महिलाओं की भागीदारी अभी भी बेहद सीमित बनी हुई है।

रोजगार बाजार में गिग सेक्टर की बढ़ती हुई भूमिका

रेडसीर स्ट्रैटेजी की हालिया रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में देश के भीतर करीब 60 लाख मासिक सक्रिय गिग वर्कर्स हैं और इस दशक के अंत तक यह सेक्टर कुल नौकरियों का 70 प्रतिशत हिस्सा पूरा कर सकता है, जहां फुल-टाइम काम करने वाले गिग वर्कर्स की औसत प्रति घंटा कमाई 138 रुपये तक दर्ज की गई है।

घरेलू सेवाओं में सबसे अधिक आय और कमाई के आंकड़े

मासिक आय के मामले में घरेलू सेवाएं सबसे आगे चल रही हैं, जहां इस क्षेत्र के फुल-टाइम कर्मियों की शुद्ध आय 80 हजार रुपये तक है, जबकि ड्राइवरों की आय 39 हजार और डिलीवरी वर्कर्स की कमाई 22 हजार से 23 हजार रुपये के बीच बनी हुई है।

बेरोजगार युवाओं और नए कामगारों के लिए बड़ा जरिया

चौंकाने वाले आंकड़ों के अनुसार गिग प्लेटफॉर्म से जुड़ने वाले 54 फीसदी लोगों के पास इससे पहले कोई रोजगार नहीं था, जिससे यह सेक्टर पहली बार नौकरी की तलाश करने वालों के लिए एक प्रमुख माध्यम बनता जा रहा है और वर्ष 2030 तक केवल राइड-हेलिंग बिजनेस में ही 1.4 करोड़ तक वर्कर्स होने की संभावना है।