पवित्र सावन मास का शुभारंभ 30 जुलाई 2026 से होने जा रहा है। हिंदू धर्म में सावन का महीना देवाधिदेव महादेव की आराधना, उपासना और अभिषेक के लिए अत्यंत शुभ व पवित्र माना जाता है। इस पावन काल में देश के कोने-कोने में स्थित शिवालयों में श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ता है, परंतु क्या आप जानते हैं कि भगवान शिव की महिमा और सनातन आस्था की सीमाएं केवल भारत तक ही सीमित नहीं हैं? विश्व के कई अन्य देशों में भी बाबा भोलेनाथ के अत्यंत भव्य, अलौकिक और ऐतिहासिक मंदिर सुशोभित हैं, जहाँ प्रत्येक वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए लंबी यात्रा करके पहुँचते हैं। इन प्राचीन मंदिरों की अद्भुत वास्तुकला, अनूठी धार्मिक परंपराएँ और गहरा सांस्कृतिक महत्व इन्हें दुनिया भर में बेहद खास बनाते हैं।

पड़ोसी देश नेपाल से लेकर मॉरीशस, इंडोनेशिया, मलेशिया और श्रीलंका तक भगवान शिव के ऐसे कई विश्वप्रसिद्ध धाम मौजूद हैं, जो भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की वैश्विक पहचान को जीवंत रखते हैं। सावन के इस पावन महीने में इन विदेशी मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, महामृत्युंजय जाप, रुद्राभिषेक और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है, जिसमें स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ दुनियाभर से पहुँचे शिवभक्त श्रद्धापूर्वक सम्मिलित होते हैं।

यदि आप भी इस पवित्र सावन के पावन अवसर पर विदेश की धरती पर स्थित प्रसिद्ध शिव मंदिरों के दर्शन करने की इच्छा रखते हैं, तो यहाँ दुनिया भर के चुनिंदा शिवालयों की विस्तृत जानकारी दी जा रही है। आइए जानते हैं विदेशों में स्थित भगवान भोलेनाथ के उन 5 प्रमुख मंदिरों के बारे में, जहाँ प्रत्येक शिवभक्त को अपने जीवनकाल में कम से कम एक बार दर्शन के लिए अवश्य जाना चाहिए।

1. पशुपतिनाथ मंदिर, नेपाल

  • भगवान शिव को समर्पित यह विश्व प्रसिद्ध और अत्यंत पवित्र मंदिर पड़ोसी देश नेपाल की राजधानी काठमांडू में स्थित है, जिसे यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर सूची में भी स्थान प्राप्त है।

  • इस पावन स्थल को सनातन हिंदू धर्म के सबसे पवित्र और प्रमुख शिवालयों में से एक माना जाता है।

  • पवित्र बागमती नदी के तट पर अवस्थित इस मंदिर में सावन मास के प्रत्येक सोमवार और महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु मत् टेकने पहुँचते हैं।

  • यहाँ स्थापित मुख्य शिवलिंग चतुर्मुखी (चार मुख वाले) स्वरूप में पूजे जाते हैं, तथा इस मंदिर की प्राचीन और पारंपरिक नेपाली पैगोडा वास्तुकला दुनिया भर के पर्यटकों और भक्तों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र है।

2. मुरुगन मंदिर परिसर स्थित शिवालय (शिव सन्निधि), मलेशिया

  • मलेशिया के कुआलालंपुर के निकट स्थित प्रसिद्ध बाटू केव्स (Batu Caves) परिसर में मुख्य रूप से भगवान कार्तिकेय (मुरुगन) का भव्य मंदिर दुनिया भर में विख्यात है।

  • इसी पवित्र परिसर के भीतर भगवान शिव का भी एक अत्यंत पूजनीय सन्निधि (स्थान) है, जहाँ अनगिनत श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करते हैं।

  • सावन मास के दौरान मलेशिया में बसे भारतीय मूल के तमाम श्रद्धालु भारी संख्या में इस पावन स्थल पर एकत्र होकर भगवान शिव की विशेष आराधना करते हैं।

3. अरुलमिगु श्री राजाकालीअम्मन ग्लास टेम्पल, मलेशिया

  • मलेशिया के जोहोर बाहरू शहर में स्थित यह मंदिर अपनी अनूठी और भव्य बनावट के लिए जाना जाता है।

  • यह विश्व का अपनी तरह का पहला ऐसा हिंदू मंदिर है जो पूरी तरह से चमकदार काँच (Glass) की सुंदर सजावट और कलाकारी से सुसज्जित है।

  • यद्यपि यह मुख्य रूप से देवी को समर्पित मंदिर है, तथापि इसके प्रांगण में भगवान शिव सहित अन्य प्रमुख देवी-देवताओं की मूर्तियाँ स्थापित हैं जिनकी नियमित रूप से पूजा की जाती है।

  • सावन के पवित्र दिनों में इस मंदिर में विशेष शिव पूजन और विभिन्न सांस्कृतिक व धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जो इसकी भव्यता को और बढ़ा देते हैं।

4. गंगा तलाव शिव मंदिर, मॉरीशस

  • हिंद महासागर में स्थित खूबसूरत द्वीप देश मॉरीशस में स्थित 'गंगा तलाव' (जिसे ग्रां बासिन भी कहा जाता है) वहाँ के हिंदू श्रद्धालुओं का सबसे बड़ा और पवित्र तीर्थ स्थल माना जाता है।

  • इस शांत और खूबसूरत झील के किनारे भगवान शिव का अत्यंत भव्य मंदिर और महादेव की एक विशालकाय प्रतिमा स्थापित है, जो देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों व भक्तों के आकर्षण का मुख्य केंद्र है।

  • सावन मास और महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु नंगे पाँव पैदल यात्रा (कांवड़ यात्रा की तर्ज पर) करके यहाँ पहुँचते हैं और पवित्र जल से जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना करते हैं।

5. मुननेश्वरम मंदिर, श्रीलंका

  • श्रीलंका के पुट्टलम जिले में स्थित यह प्राचीन और ऐतिहासिक शिव मंदिर पौराणिक काल से जुड़ी मान्यताओं के कारण विशेष धार्मिक महत्व रखता है।

  • हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस स्थल को वही पावन स्थान माना जाता है जहाँ मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने रावण का वध करने के उपरांत अपने ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की आराधना और पूजा की थी।

  • सावन के इस पवित्र महीने में यहाँ विशेष हवन, रुद्राभिषेक और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है, जिसमें भाग लेने के लिए दूर-दूर से भक्त आते हैं।