नैनीताल। सरोवर नगरी नैनीताल में बीती रात हुई भीषण बरसात ने शहर की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया और रात भर लोग सहमे रहे। तेज आंधी और कड़कड़ाती हवाओं के साथ करीब 90 मिलीमीटर रिकॉर्ड तोड़ वर्षा दर्ज की गई है। इस मूसलाधार बारिश के कारण शहर के तमाम नाले उफान पर आ गए, जिससे किनारे जमा कचरे के बड़े-बड़े ढेर सीधे नैनी झील में समा गए। इस जलभराव और गंदगी ने नगरपालिका व सिंचाई विभाग द्वारा मानसून से पहले किए जाने वाले नालों की सफाई के दावों की पूरी पोल खोलकर रख दी है। सोमवार को भी पूरे दिन आसमान में काले घने बादल छाए रहे, जिससे आने वाले दिनों में और अधिक बारिश के आसार बने हुए हैं।

प्रमुख मार्गों पर पेड़ गिरने से लगा लंबा जाम, राहगीर परेशान

इस भीषण आंधी और बारिश का सबसे बुरा असर शहर की यातायात व्यवस्था पर पड़ा। तेज हवाओं के कारण हल्द्वानी-नैनीताल हाईवे और नैनीताल-पंगोट मार्ग पर विशालकाय पेड़ उखड़कर सड़कों पर आ गिरे, जिससे दोनों ओर से आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही दमकल विभाग और स्थानीय पुलिस की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। रेस्क्यू टीम और लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) के बुलडोजर की मदद से कड़ी मशक्कत के बाद हल्द्वानी मार्ग को करीब 45 मिनट में सुचारू किया जा सका, जबकि पंगोट मार्ग को सुबह सवा दस बजे जाकर खोला जा सका। इस दौरान मार्ग के दोनों ओर बड़ी संख्या में पर्यटकों और स्थानीय लोगों के वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

नैनी झील का जलस्तर पांच इंच बढ़ा, तैरती दिखीं प्लास्टिक की बोतलें

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, भले ही मुख्य मानसून के दस्तक देने में अभी कुछ दिनों का समय बाकी है, लेकिन प्री-मानसून की यह बारिश शहर पर पूरी तरह मेहरबान दिख रही है। रात एक बजे शुरू हुआ बारिश का यह तांडव सुबह करीब छह बजे तक लगातार जारी रहा। इतनी जबरदस्त बारिश के चलते विश्व प्रसिद्ध नैनी झील का जलस्तर करीब पांच इंच बढ़कर 79.1 फीट के स्तर पर पहुंच गया है। इसके साथ ही शहर के सूखे पड़े प्राकृतिक जलस्रोत भी दोबारा रिचार्ज होने लगे हैं। हालांकि, चिंता की बात यह रही कि उफनाए नालों के जरिए भारी मात्रा में निर्माण सामग्री का मलबा, प्लास्टिक की बोतलें, शीतल पेय के डिब्बे और थैलियां झील के पानी में समा गईं, जो सुबह तल्लीताल डांठ के आसपास तैरती हुई नजर आईं।

युद्धस्तर पर शुरू हुआ झील सफाई का काम, जल्द पहुंचेगा मानसून

झील की सुंदरता पर दाग लगते देख नगरपालिका प्रशासन तुरंत हरकत में आया और युद्धस्तर पर सफाई कार्य शुरू कर दिया गया है। पालिका कर्मी अनिल कटियार के नेतृत्व में कर्मचारियों की टीम सुबह से ही नावों के जरिए झील से प्लास्टिक कचरा और मलबा हटाने में जुटी है। सफाई दल के मुताबिक, अब तक तल्लीताल डांठ के पास से करीब दो कैंटर मलबा और प्लास्टिक की बोतलें बाहर निकाली जा चुकी हैं। दूसरी ओर, राज्य मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों का कहना है कि यह प्री-मानसून की बारिश है और परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हैं, जिससे अगले एक-दो दिनों के भीतर ही मुख्य मानसून के उत्तराखंड में विधिवत प्रवेश करने की पूरी संभावना बनी हुई है।