महंगाई ने फिर बढ़ाई चिंता, Petrol-Diesel और LPG के ताजा रेट्स देखें
नई दिल्ली: देश के आम नागरिक के मासिक बजट पर एक साथ कई अलग-अलग मोर्चों से आर्थिक दबाव बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। एक तरफ जहाँ अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों ने एक बार फिर से तेज रफ्तार पकड़ ली है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय घरेलू बाजार में भी ईंधन के दाम पहले से ही अपने रिकॉर्ड स्तर पर मजबूती से टिके हुए हैं। इसके साथ ही रसोई गैस (एलपीजी) सिलेंडर की ऊंची कीमतों ने आम उपभोक्ताओं की कमर तोड़ दी है। हालत यह हो चुकी है कि माल ढुलाई और ट्रांसपोर्टेशन का खर्च बढ़ने की वजह से अब रोजाना के सामानों की कीमतें भी प्रभावित हो रही हैं, जिससे देश के मध्यम वर्ग के किचन से लेकर गाड़ी चलाने तक का हर खर्च सीधे तौर पर प्रभावित हो रहा है।
देश के महानगरों में ईंधन की कीमतों का पुराना रिकॉर्ड बरकरार
भारत के प्रमुख महानगरों में रहने वाले लोगों को पेट्रोल और डीजल की रोजाना बढ़ती-घटती कीमतों से फिलहाल कोई बड़ी राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। अगर देश की राजधानी दिल्ली की बात करें, तो यहाँ पेट्रोल की कीमत लगभग 102 रुपये प्रति लीटर के आसपास बनी हुई है, जबकि डीजल का भाव भी 89 रुपये प्रति लीटर के बेहद करीब टिका हुआ है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में तो हालात और भी ज्यादा खराब हैं, जहाँ आम जनता को एक लीटर पेट्रोल के लिए 111 रुपये से अधिक और डीजल के लिए करीब 97 रुपये का भारी भुगतान करना पड़ रहा है। भले ही तेल कंपनियां रोज कीमतों में कोई नया बड़ा उछाल नहीं कर रही हों, लेकिन इनका वर्तमान का यह उच्चतम स्तर ही आम लोगों के मासिक बजट को बिगाड़ने के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।
कोलकाता से चेन्नई तक महंगाई का बढ़ता दायरा
ईंधन की इस बेलगाम महंगाई का असर सिर्फ दिल्ली-मुंबई तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देश के अन्य बड़े शहरों में भी आम आदमी को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। कोलकाता और चेन्नई जैसे प्रमुख शहरों में भी पेट्रोल की खुदरा कीमतें 107 रुपये से लेकर 113 रुपये प्रति लीटर के बेहद ऊंचे दायरे में घूम रही हैं। इसके साथ ही इन दोनों शहरों में डीजल का भाव भी 94 रुपये से लेकर 99 रुपये प्रति लीटर के बीच बना हुआ है। जानकारों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी नहीं आती या सरकार टैक्स में कोई बड़ी कटौती नहीं करती, तब तक आम उपभोक्ताओं को इस चौतरफा महंगाई की मार से राहत मिलने की उम्मीद बेहद कम है।
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