नैनीताल: सरोवर नगरी नैनीताल के सबसे व्यस्ततम और प्रमुख चौराहों में से एक, तल्लीताल डांठ पर स्थापित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की नव-स्थापित भव्य प्रतिमा इन दिनों नियमों और मर्यादाओं को ताक पर रखकर पर्यटकों के लिए महज एक 'सेल्फी प्वाइंट' बनकर रह गई है। मौजूदा समर पर्यटन सीजन के दौरान यहां पहुंचने वाले कई बेपरवाह सैलानी फोटो खिंचवाने की सनक में बापू की गरिमा को ठेस पहुंचाते हुए प्रतिमा के ऊपर तक चढ़ रहे हैं। इंटरनेट मीडिया पर जूतों समेत प्रतिमा पर चढ़े पर्यटकों और बच्चों की कुछ तस्वीरें तेजी से प्रसारित होने के बाद, जिला प्रशासन हरकत में आया है। नैनीताल के जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने इन तस्वीरों और अमर्यादित कृत्य का कड़ा संज्ञान लेते हुए मामले में उचित जांच और आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

बीते साल ही हुआ था सुंदरीकरण, डांठ पर मौजूद हैं बापू की दो अनूठी प्रतिमाएं

इस ऐतिहासिक चौराहे के विकासक्रम पर नजर डालें तो अगस्त 2025 में तल्लीताल डांठ के कायाकल्प और सुंदरीकरण की योजना के तहत पुरानी गांधी मूर्ति को वहां से शिफ्ट (स्थानांतरित) किया गया था। इसके बाद चौराहे के ठीक मध्य में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की चरखा कातते हुए एक बेहद सुंदर और नई मूर्ति स्थापित की गई।

इसके बाद, अक्टूबर 2025 में पुरानी प्रतिमा को भी पूरे आदर के साथ रंगरोगन और मरम्मत कर डांठ के एक छोर पर कलेक्ट्रेट मार्ग की ओर दोबारा स्थापित कर दिया गया। इस भौगोलिक बदलाव के बाद यह संभवतः राज्य का पहला ऐसा अनूठा चौराहा बन गया है, जहां एक ही परिसर के भीतर राष्ट्रपिता की दो अलग-अलग मूर्तियां मौजूद हैं। नई प्रतिमा के साथ ही बापू के संदेश को दर्शाते उनके 'तीन बंदरों' के बुत भी लगाए गए हैं, जो पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र हैं।

इंटरनेट पर वायरल हुईं अपमानजनक तस्वीरें, जूतों के साथ गले में हाथ डालकर खिंचाई फोटो

विवाद की शुरुआत शुक्रवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुई कुछ तस्वीरों के बाद हुई, जिसने स्थानीय लोगों और गांधीवादी विचारकों को बुरी तरह आहत कर दिया है। इन वायरल तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि कुछ पर्यटन परिवारों के बच्चे और युवा पैरों में जूते-चप्पल पहने हुए ही महापुरुष की गरिमा का माखौल उड़ाते हुए उनके गले में हाथ डालकर और प्रतिमा के ऊपर चढ़कर पाउट और पोज देते हुए धड़ल्ले से तस्वीरें खिंचवा रहे हैं। स्थानीय जागरूक नागरिकों का कहना है कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि देश के महापुरुषों और राष्ट्रीय प्रतीकों का सरेआम किया जा रहा अपमान है।

प्रशासनिक अमला बेपरवाह, जिम्मेदारी को लेकर टालमटोल का रवैया

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिस स्थान पर यह अभद्रता हो रही है, वहां से महज कुछ ही कदमों की दूरी पर तल्लीताल पुलिस की स्थाई चौकी और चेकिंग पॉइंट मौजूद है। इसके बावजूद, सुरक्षाकर्मियों को दिनदहाड़े होने वाली यह हरकत नजर नहीं आई।

इस संवेदनहीनता पर जब मीडिया और जागरूक वर्ग ने सवाल उठाए, तो कोतवाली प्रभारी (कोतवाल) हरपाल सिंह ने एक अजीबोगरीब दलील देते हुए पल्ला झाड़ लिया। उनका कहना है कि स्थानीय पुलिस का मुख्य और प्राथमिक कार्य केवल यातायात (ट्रैफिक) व्यवस्था को दुरुस्त रखना और जाम से मुक्ति दिलाना है। महापुरुषों की मूर्तियों की सुरक्षा और पर्यटकों की ऐसी हरकतों को रोकना पर्यटन विभाग, नगर पालिका या अन्य संबंधित नागरिक निकायों का काम है, उन्हें ही इस पर नजर रखनी चाहिए। बहरहाल, पीक टूरिस्ट सीजन की भारी भीड़ के बीच बीच चौराहे पर राष्ट्रपिता के इस सार्वजनिक अपमान और उस पर सरकारी तंत्र की यह बेरुखी व टालमटोल का रवैया स्थानीय गांधीवादियों और संस्कृति प्रेमियों को बेहद विचलित और परेशान कर रहा है।