धड़ाम हुआ महाअभियान का पहला दिन: सिस्टम की सुस्ती के आगे बेखौफ दिखे अवैध कारोबारी
नई दिल्ली | मालवीय नगर के हौजरानी इलाके में हुए भीषण अग्निकांड ने न केवल संपत्तियों को खाक किया है, बल्कि सुरक्षा को लेकर आम जनता के भरोसे को भी हिलाकर रख दिया है। एक ओर जहां पीड़ित परिवारों में कोहराम मचा है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक महकमों में केवल बैठकों का दौर चल रहा है। धरातल पर कड़े कदम उठाने में आ रही सुस्ती के कारण ही हादसे के बाद अवैध होटलों के खिलाफ घोषित किए गए सीलिंग अभियान के पहले दिन कोई ठोस जमीन कार्रवाई देखने को नहीं मिली।
कागजों तक सीमित रहा सीलिंग अभियान
इस दर्दनाक हादसे के बाद उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने गृह विभाग और पुलिस के उच्च अधिकारियों के साथ एक आपातकालीन बैठक की थी। इस बैठक में बृहस्पतिवार से अवैध होटल, रेस्तरां और कोचिंग सेंटरों के खिलाफ एक महीने का व्यापक अभियान चलाने का सख्त आदेश दिया गया था। लेकिन हकीकत यह रही कि प्रशासनिक सुस्ती के कारण पूरा दिन बीत जाने के बाद भी यह कार्रवाई केवल फाइलों तक ही सीमित रही, जिससे स्थानीय लोगों में भारी निराशा है।
चुनावी वादे और प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल
शहर में अनधिकृत निर्माणों को संरक्षण देने वाले राजनीतिक वादे अब आम लोगों की जान पर भारी पड़ रहे हैं। बिना वैध लाइसेंस या नियमों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे इन व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर लगाम लगाने में सरकारी एजेंसियां नाकाम साबित हुई हैं। पर्यटन विभाग की पुरानी योजनाओं का दुरुपयोग कर बड़े होटल चलाए जा रहे हैं, जबकि नगर निगम (MCD) ने केवल सीमित अनुमति की बात कहकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है। इसके साथ ही स्थानीय पुलिस, बिजली विभाग और फायर सेफ्टी महकमे की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर बिना पर्याप्त एनओसी और सुरक्षा इंतजामों के ये बहुमंजिला इमारतें सालों से कैसे संचालित हो रही थीं।
जवाबदेही तय करने की मांग
सैदुलाजाब में ढही इमारत और अब मालवीय नगर के इस अग्निकांड जैसी घटनाओं के बाद भी प्रशासन केवल अगली बैठकों की रूपरेखा तैयार करने में व्यस्त दिखाई दे रहा है। इस भीषण त्रासदी में 21 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है, लेकिन अब तक किसी भी जिम्मेदार सरकारी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई या जवाबदेही तय नहीं की गई है। पीड़ित जनता का मानना है कि अब खोखले आश्वासनों के बजाय दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और व्यवस्था में सुधार की सख्त जरूरत है।
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