
गया जी, गया कॉलेज के 83वें स्थापना दिवस के अवसर पर आज एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर बिहार के महामहिम राज्यपाल श्री आरिफ मोहम्मद खान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता गया कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सतीश सिंह चंद्र ने की।
विशिष्ट अतिथियों में बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार, माननीय मंत्री उद्योग एवं सड़क डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल, माननीय मंत्री भवन निर्माण विभाग डॉ. अशोक कुमार चौधरी, विधान पार्षद श्री जीवन कुमार, मगध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शशि प्रताप शाही सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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महामहिम राज्यपाल का स्वागत गया एयरपोर्ट पर मगध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शशि प्रताप शाही द्वारा पुष्पगुच्छ एवं अंगवस्त्र भेंट कर किया गया। महाविद्यालय परिसर में एनसीसी कैडेट्स द्वारा उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके पश्चात महामहिम द्वारा स्वामी विवेकानंद की आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया गया।
एकता सभागार में आयोजित मुख्य कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगान से हुई। इसके बाद महाविद्यालय द्वारा प्रकाशित शतदल एवं स्वामी विवेकानंद पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया गया। कला भारती के विद्यार्थियों द्वारा कुलगीत की भावपूर्ण प्रस्तुति दी गई।
अपने संबोधन में महामहिम राज्यपाल श्री आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि “शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाले जागरूक नागरिकों का निर्माण करना है। गया कॉलेज जैसी संस्थाएं इस दायित्व को दशकों से निभा रही हैं।”
बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि “गया कॉलेज बिहार की शैक्षणिक धरोहर है। यहां से निकले विद्यार्थियों ने प्रशासन, शिक्षा और समाज के हर क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है।”
मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि “शिक्षा और उद्योग का समन्वय राज्य के विकास की कुंजी है। ऐसे शैक्षणिक संस्थान नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।”
मंत्री डॉ. अशोक कुमार चौधरी ने अपने वक्तव्य में कहा कि “भवन और आधारभूत संरचना के साथ-साथ शैक्षणिक गुणवत्ता पर ध्यान देना आवश्यक है। गया कॉलेज इस दिशा में निरंतर प्रगति कर रहा है।”
एमएलसी श्री जीवन कुमार ने कहा कि “गया कॉलेज का इतिहास गौरवशाली रहा है और इसका भविष्य भी उज्ज्वल है।”
कुलपति प्रो. शशि प्रताप शाही ने कहा कि “मगध विश्वविद्यालय को गया कॉलेज जैसी विरासत प्राप्त होना गर्व की बात है। विश्वविद्यालय हर संभव सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है।”
अंत में प्राचार्य प्रो. सतीश सिंह चंद्र ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि “महाविद्यालय शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्रनिर्माण के अपने लक्ष्य पर दृढ़ता से आगे बढ़ता रहेगा।”
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।














